BRICS में शामिल होने के लिए पाकिस्तान की नई कोशिश! रूस से मांगा समर्थन, भारत से बातचीत के संकेत

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BRICS: पाकिस्तान ब्रिक्स (BRICS) का पूर्ण सदस्य बनना चाहता है। उसने ब्रिक्स समूह के भीतर अपनी उम्मीदवारी के लिए व्यापक समर्थन की उम्मीद भी जताई है। यह बयान रूस में पाकिस्तानी राजदूत फैसल नियाज तिरमिजी ने दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान भारत के साथ बातचीत के लिए तैयार है और आशा करता है कि इससे आपसी समझ, संवाद और सहयोग बढ़ेगा। ब्रिक्स (BRICS) दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों का एक समूह है, जिसमें पाकिस्तान शामिल नहीं है।

भारत को छोड़कर…

रूस की TASS को दिए इंटरव्यू में पाकिस्तानी राजदूत फैसल नियाज तिरमिजी ने कहा, “पाकिस्तान BRICS के लिए एक स्वाभाविक साझेदार है। केवल एक देश BRICS में पाकिस्तान के शामिल होने का विरोध करता है। कोई अन्य देश BRICS में पाकिस्तान के शामिल होने पर आपत्ति नहीं करता है। पाकिस्तान SCO का सदस्य है। भारत भी है। इसलिए, पाकिस्तान BRICS का सदस्य बन सकता है और उसे बनना भी चाहिए। भारत को छोड़कर, बाकी सभी देशों ने पाकिस्तान को सदस्य के रूप में देखने की अपनी पक्की इच्छा जाहिर की है।” पाकिस्तान BRICS के लिए एक स्वाभाविक साझेदार है। केवल एक देश BRICS में पाकिस्तान के शामिल होने का विरोध करता है।

पाकिस्तान के समर्थन में कितने देश

उन्होंने विश्वास जताया कि BRICS में पाकिस्तान के शामिल होने से “संगठन को बहुत फायदा होगा।” उन्होंने कहा, “रूस ने हमेशा इसका समर्थन किया है। चीन इसका समर्थन करता है। दक्षिण अफ्रीका इसका समर्थन करता है। ब्राजील इसका समर्थन करता है।” इस दौरान उन्होंने कहा कि सिर्फ भारत ही पाकिस्तान की सदस्यता का समर्थन नहीं कर रहा है।

भारत-पाकिस्तान बातचीत पर यह कहा

पाकिस्तानी राजदूत ने कहा, “पाकिस्तान हमेशा से भारत के साथ बातचीत के लिए खुला रहा है। मैंने अपने करियर के सात साल भारतीय नेतृत्व में बिताए हैं और भारत-पाकिस्तान के बीच संबंधों की इतनी दयनीय स्थिति मैंने पहले कभी नहीं देखी।” उन्होंने आगे कहा, भारत और पाकिस्तान एक-दूसरे को अनदेखा नहीं कर सकते। भारतीयों से बात करना मेरे लिए आसान है क्योंकि हम लगभग एक ही भाषा बोलते हैं। ऐतिहासिक रूप से, दोनों देशों के बीच नियमित संपर्क रहे हैं। इसलिए मुझे उम्मीद है कि भारतीय जनता और भारतीय सरकार पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों पर गंभीरता से पुनर्विचार करेंगे और दोनों देशों और दोनों जनता के बीच अधिक आपसी समझ, संवाद और सहयोग बढ़ेगा।

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