बन्नू और कुर्रम में गोलियां चलीं, 13 आतंकी ढेर, मगर सच्चाई इससे भी डरावनी

Pakistan Terrorism

Pakistan Terrorism: पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी सीमाई इलाकों में हालात एक बार फिर बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में सुरक्षाबलों और उग्रवादी संगठनों के बीच टकराव तेज होता जा रहा है। पाकिस्तानी सेना ने दावा किया है कि पिछले 48 घंटों में किए गए दो अलग-अलग खुफिया अभियानों में कुल 13 आतंकवादियों को मार गिराया गया है।

बन्नू और कुर्रम में आधी रात को सैन्य कार्रवाई

पाकिस्तानी सेना की मीडिया विंग इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) के मुताबिक, ये दोनों ऑपरेशन 13 और 14 जनवरी की दरमियानी रात को अंजाम दिए गए। कार्रवाई खैबर पख्तूनख्वा के उन इलाकों में हुई, जो लंबे समय से उग्रवाद की आग में झुलस रहे हैं।

  • बन्नू जिला: यहां खुफिया सूचना के आधार पर सुरक्षा बलों ने एक संदिग्ध ठिकाने को घेर लिया। देर रात हुई भीषण गोलीबारी के बाद 8 आतंकवादियों को ढेर कर दिया गया। सेना का दावा है कि ये सभी आतंकी ‘फितना अल ख्वारिज’ समूह से जुड़े थे।
  • कुर्रम जिला: दूसरे ऑपरेशन में सुरक्षा बलों ने 5 और आतंकियों को मार गिराने का दावा किया है। मौके से बड़ी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री बरामद की गई है।

लगातार ऑपरेशन, फिर भी नहीं थम रही आतंकी हिंसा

यह सैन्य कार्रवाई ऐसे समय पर हुई है, जब कुछ ही दिन पहले बलूचिस्तान के कलात जिले में हुए एक एनकाउंटर में भी चार आतंकवादी मारे गए थे। हालांकि, इन दावों के बावजूद पाकिस्तान के भीतर सुरक्षा हालात लगातार बिगड़ते नजर आ रहे हैं।

रिपोर्ट ने खोली पाकिस्तान की असल तस्वीर

पाक इंस्टीट्यूट फॉर पीस स्टडीज (PIPS) की ताजा रिपोर्ट ने पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता खड़ी कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार:

  • साल 2025 में आतंकी हमलों में 34% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
  • आतंकी घटनाओं में जान गंवाने वालों की संख्या 21% तक बढ़ गई है।

ये आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि सैन्य अभियानों के बावजूद आतंकवाद पर पूरी तरह लगाम नहीं लग पाई है।

क्या है ‘फितना अल ख्वारिज’?

पाकिस्तानी प्रशासन अब पाकिस्तानी तालिबान (TTP) जैसे आतंकी संगठनों को संबोधित करने के लिए ‘फितना अल ख्वारिज’ शब्द का इस्तेमाल कर रहा है। धार्मिक संदर्भों में यह शब्द उन गुटों के लिए प्रयोग किया जाता है, जो इस्लाम की गलत व्याख्या कर हिंसा और विद्रोह फैलाते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि नाम बदलने से जमीनी हकीकत नहीं बदलती, जब तक आतंकवाद की जड़ पर प्रहार नहीं किया जाए।

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