मिडिल ईस्ट संकट के बीच वित्त मंत्री का बड़ा संदेश, जानिए क्या है ‘3F फॉर्मूला’

Nirmala Sitharaman

Nirmala Sitharaman: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) कम करने से लगभग 1 लाख करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होगा. उन्होंने लोगों में विश्वास जगाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया और कहा कि भारत भय फैलाने का जोखिम नहीं उठा सकता. निर्मला सीतारमण की ये टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब फ्यूल की कीमतों में एक बार (Nirmala Sitharaman)फिर बढ़ोतरी हुई है, जो 10 दिनों में चौथी बढ़ोतरी है.

सोमवार को पेट्रोल की कीमत में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 2.71 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई, जिससे परिवारों के बजट और परिवहन लागत पर और दबाव बढ़ गया है. भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (एसआईडीबीआई) की 37वीं वर्षगांठ के अवसर पर बोलते हुए सीतारमण ने पीएम मोदी की अपील के बाद नकारात्मक बातों से फैल रहे निराशावादी माहौल की आलोचना की. उन्होंने कहा कि देश भय फैलाने का जोखिम नहीं उठा सकता और शब्दों और कार्यों दोनों के जरिए नागरिकों में विश्वास जगाने की आवश्यकता है.

‘तीन F’ पर फोकस करें

मिडिल ईस्ट संकट को तीन महीने होने वाले हैं. इसी को लेकर वित्त मंत्री सीतारमण ने फ्यूल (ईंधन), फर्टिलाइजर (उर्वरक) और फॉरेक्स (विदेशी मुद्रा) इन तीन F पर फोकस करने की अपील की. इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है. वित्त मंत्री ने बढ़ते वैश्विक दबावों की ओर भी इशारा करते हुए कहा कि उर्वरक की कीमतें अकल्पनीय स्तर पर पहुंच गई हैं, जबकि सोने की ऊंची कीमतें बाहरी मोर्चे पर कुछ चुनौतियां पैदा कर रही हैं.

उन्होंने आगे कहा कि कुछ लोग इस स्थिति को इस तरह पेश कर रहे हैं जैसे सब कुछ बिखर रहा हो, जबकि उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसा नहीं है. हमें यह समझना चाहिए कि चुनौतियां बाहरी कारणों से अधिक हैं. भारत की घरेलू आर्थिक स्थिति आज भी सकारात्मक और मजबूत बनी हुई है.

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