खेजड़ी को बचाने के लिए सरकार लाएगी नया कानून, सीएम भजनलाल शर्मा ने विधानसभा में दिया भरोसा

Bhajanlal Sharma

Bhajanlal Sharma: राजस्थान की आस्था और पहचान माने जाने वाले राज्य वृक्ष खेजड़ी को लेकर भजनलाल सरकार ने बड़ा कदम उठाने का संकेत दिया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गुरुवार विधानसभा में साफ कहा कि खेजड़ी के संरक्षण के लिए राज्य में नया कानून बनाया जाएगा। (Bhajanlal Sharma) उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रक्रिया पूरी होते ही इसका मसौदा विधेयक सदन में पेश किया जाएगा।

राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान दिया आश्वासन

मुख्यमंत्री विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा का जवाब दे रहे थे। इस दौरान उन्होंने खेजड़ी को केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि राजस्थान की आत्मा बताते हुए भावुक अंदाज में कहा—

“खेजड़ी केवल एक वृक्ष नहीं, बल्कि राजस्थान के त्याग, शौर्य और जीवंतता का प्रतीक है। ‘विकास भी, विरासत भी’ के संकल्प के साथ हमारी सरकार खेजड़ी के संरक्षण के लिए सशक्त कानून लाएगी।”

दलगत राजनीति से ऊपर उठने की अपील

सीएम शर्मा ने कहा कि खेजड़ी के महत्व को देखते हुए ही इसे राज्य वृक्ष घोषित किया गया है। उन्होंने सभी दलों और जनप्रतिनिधियों से अपील की कि इस मुद्दे पर राजनीति से ऊपर उठकर सामूहिक प्रयास किए जाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियों को हरा-भरा राजस्थान सौंपा जा सके।

“प्रक्रिया पूरी होते ही सदन में लाएंगे मसौदा”

मुख्यमंत्री ने सदन के माध्यम से जनता को आश्वस्त करते हुए कहा कि खेजड़ी संरक्षण कानून को लेकर अधिकारियों को पहले ही निर्देश दिए जा चुके हैं। जैसे ही प्रक्रिया पूरी होगी, सरकार विधेयक को विधानसभा में पेश करेगी।

बीकानेर में आंदोलन जारी, कानून की मांग तेज

गौरतलब है कि बीकानेर में पर्यावरण प्रेमियों और संत समुदाय का धरना लगातार जारी है। आंदोलनकारी राज्य में वृक्ष संरक्षण कानून बनाने और खेजड़ी की कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग कर रहे हैं।

5 फरवरी को मंत्री के के बिश्नोई, राज्य जीव-जंतु कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष जसवंत सिंह बिश्नोई और भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष बिहारीलाल बिश्नोई आंदोलनकारियों से बातचीत के लिए महापड़ाव स्थल पहुंचे थे। हालांकि, बातचीत के बावजूद धरना समाप्त नहीं हुआ है।

आंदोलनकारियों की दो प्रमुख मांगें हैं— इसी विधानसभा सत्र में वृक्ष संरक्षण कानून पारित किया जाए और पूरे राजस्थान में खेजड़ी के पेड़ों की कटाई पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाए। अब निगाहें सरकार के अगले कदम और कानून के मसौदे पर टिकी हैं।

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