किश्तवाड़ की बर्फीली पहाड़ियों में क्या घिर गए जैश के बड़े आतंकी? सेना का सबसे बड़ा ऑपरेशन जारी

Chilla-i-Kalan

Chilla-i-Kalan: जम्मू-कश्मीर एक बार फिर सुरक्षा कारणों से सुर्खियों में है। इस बार वजह है किश्तवाड़ और डोडा की दुर्गम पहाड़ियों में चल रहा भारतीय सेना का बड़ा और निर्णायक आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन। बीते एक हफ्ते से सेना जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के कुख्यात आतंकियों की तलाश में इलाके को चारों तरफ से खंगाल रही है।

सूत्रों के मुताबिक, इस ऑपरेशन का मुख्य लक्ष्य जैश का स्थानीय कमांडर सैफुल्लाह, उसका साथी आदिल और उनके अन्य सहयोगी हैं। आशंका है कि ये आतंकी किश्तवाड़ की घने जंगलों और(Chilla-i-Kalan) ऊंची पहाड़ियों में छिपे हुए हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सेना ने बड़े स्तर पर घेराबंदी और तलाशी अभियान शुरू किया है।

क्यों किश्तवाड़ बना आतंकियों की शरणस्थली?

किश्तवाड़ जिला लंबे समय से आतंकियों के लिए चुनौतीपूर्ण लेकिन सुरक्षित इलाका माना जाता रहा है। ऊंची पहाड़ियां, घने जंगल और सीमित संपर्क मार्ग आतंकियों को छिपने में मदद करते हैं। इसी वजह से सेना ने चतरू सब-डिवीजन के कई गांवों से सर्च ऑपरेशन शुरू किया है।

सैनिक घर-घर तलाशी ले रहे हैं और हर संदिग्ध गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जा रही है। इसके साथ ही केशवन इलाके में भी नया ऑपरेशन शुरू किया गया है, जो जिला मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर दूर स्थित है।

2000 से ज्यादा जवान, बड़ा मिशन?

इस पूरे अभियान में 2000 से ज्यादा जवान लगाए गए हैं। इतना बड़ा बल यह संकेत देता है कि सेना इस बार किसी भी तरह की ढील नहीं देना चाहती। डोडा जिले के सोजधार इलाके में भी लगातार तलाशी अभियान जारी है।

खास बात यह है कि स्थानीय ग्रामीण भी सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। इलाके की जानकारी होने के कारण वे संदिग्ध गतिविधियों की सूचना सुरक्षा बलों तक पहुंचा रहे हैं।

हिजबुल कमांडर भी रडार पर

किश्तवाड़ के पद्दर सब-डिवीजन में एक अलग ऑपरेशन चलाया जा रहा है। यह इलाका हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादी कमांडर जहांगीर सरूरी का गढ़ माना जाता है।

उसके साथ मुदस्सिर और रियाज नाम के दो स्थानीय आतंकी भी सक्रिय बताए जा रहे हैं, जिन पर 10-10 लाख रुपये का इनाम घोषित है। आमतौर पर सर्दियों के सबसे कठिन दौर ‘चिल्लई कलां’ के दौरान आतंकवादी गतिविधियां कम हो जाती हैं। भारी बर्फबारी और बंद रास्तों के कारण ऑपरेशन सीमित कर दिए जाते हैं। लेकिन इस बार सेना ने रणनीति बदल दी है।

बर्फीली पहाड़ियों में प्रोएक्टिव विंटर स्ट्रैटेजी

रक्षा सूत्रों के अनुसार, सेना ने इस सर्दी “प्रोएक्टिव विंटर पोज़िशन” अपनाई है। इसके तहत बर्फीले इलाकों में अस्थायी कैंप, निगरानी चौकियां और गश्ती मार्ग तैयार किए गए हैं। शून्य से नीचे तापमान और कम विजिबिलिटी के बावजूद सेना के जवान लगातार पहाड़ियों, घाटियों और जंगलों में गश्त कर रहे हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह रणनीति सेना की बदलती सोच और मजबूत इरादों को दर्शाती है। साफ संदेश है—मौसम, बर्फ या दुर्गम इलाका अब आतंक के खिलाफ लड़ाई में रुकावट नहीं बनेगा। सेना का लक्ष्य स्पष्ट है—आतंकियों को कहीं भी छिपने का मौका न मिले और जम्मू-कश्मीर में शांति को किसी भी कीमत पर कायम रखा जाए।

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