रिटायरमेंट से पहले IAS फंसे! जल जीवन मिशन में बड़ा खेल, ACB की लिस्ट में अगला नाम कौन?

Jal Jeevan Mission Scam

Jal Jeevan Mission Scam: राजस्थान में जल जीवन मिशन, जो आम आदमी के घर तक स्वच्छ पानी पहुंचाने का सपना था, वही योजना अब भ्रष्टाचार की मिसाल बनती जा रही है। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुए इस कथित घोटाले में अब बड़ा एक्शन तय माना जा रहा है। राज्य सरकार ने सीनियर आईएएस सुबोध अग्रवाल सहित कई अफसरों के (Jal Jeevan Mission Scam)खिलाफ केस चलाने की मंजूरी देकर साफ संकेत दे दिए हैं कि फाइलों में दबा मामला अब जमीन पर उतर चुका है।

एसीबी एक्शन मोड में, गिरफ्तारियां तेज

सरकारी मंजूरी मिलते ही भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है।
हाल ही में घोटाले से जुड़े पांच आरोपियों की गिरफ्तारी की गई है, जिनमें एक सरकारी अधिकारी भी शामिल है।
एसीबी सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में और नाम सामने आ सकते हैं।

सीनियर आईएएस सुबोध अग्रवाल की बढ़ी मुश्किलें

राजस्थान के सबसे वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों में शामिल सुबोध अग्रवाल इस समय जांच के केंद्र में हैं।
वे इसी महीने सेवानिवृत्त होने वाले हैं, लेकिन रिटायरमेंट से महज 21 दिन पहले सरकार ने उनके खिलाफ
भ्रष्टाचार का केस चलाने की अनुमति देकर बड़ा संदेश दिया है।

एसीबी ने कुल 8 अधिकारियों के खिलाफ अनुमति मांगी थी, जिनमें से 6 को हरी झंडी मिल चुकी है।
इस फैसले के बाद यह तय माना जा रहा है कि अब वरिष्ठ अधिकारियों से भी सख्ती से पूछताछ होगी।

SIT गठित, जलदाय विभाग में छापे

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसीबी ने विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है। SIT प्रभारी महावीर सिंह के नेतृत्व में जांच शुरू हो चुकी है। दो दिन पहले जलदाय विभाग में छापेमारी कर अहम दस्तावेज जब्त किए गए हैं। तकनीकी जांच के बाद विभाग के कई अधिकारियों और कर्मचारियों को पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, सीनियर आईएएस सुबोध अग्रवाल से भी जल्द पूछताछ हो सकती है।

लंबी फेहरिस्त, सिस्टम पर उठते सवाल

इस घोटाले में अधीक्षण अभियंता, अधिशासी अभियंता और सहायक अभियंता स्तर के दर्जनों अधिकारी आरोपी बनाए गए हैं। नामों की यह लंबी सूची बताती है कि मामला केवल कुछ व्यक्तियों तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम में फैली अनियमितताओं की ओर इशारा करता है।

हैरानी की बात यह है कि कई सीनियर आईएएस और चीफ इंजीनियर स्तर के अधिकारी अभी तक चार्जशीट से बचे हुए हैं। इनमें तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव, चीफ इंजीनियर और वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी शामिल हैं। जनता के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या जल जीवन मिशन में हुए कथित भ्रष्टाचार पर सिर्फ कार्रवाई की मंजूरी ही मिलेगी, या सच में दोषियों को सजा भी मिलेगी? पानी की योजना में भ्रष्टाचार, सिस्टम की सबसे बड़ी नैतिक विफलता बनता जा रहा है।

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