Rajasthan Crime News: जयपुर के मुहाना थाना इलाके में सामने आया यह मामला एक दगाबाज नौकर की धोखाधड़ी, हिंसा और पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े करता है। आरोप है कि एक घरेलू कर्मचारी ने अपने ही मालिक को धोखा देते हुए घर से लाखों रुपये के सोने के जेवर चुरा लिए और (Rajasthan Crime News)उन्हें गोल्ड लोन कंपनी में गिरवी रखकर लोन भी उठा लिया।
पीड़ित राधेश्याम चौधरी, जो जयपुर की पत्रकार कॉलोनी में रहते हैं, ने आरोप लगाया कि उनके विश्वासपात्र रहे नौकर ने पहले घर से सोने के जेवर चोरी किए। बाद में जब सच्चाई सामने आई और उसे बुलाकर पूछताछ की गई, तो आरोपी ने माफी मांगने के बहाने घर आकर पूजा के दौरान पीछे से उन पर जानलेवा हमला कर दिया। इस हमले में राधेश्याम के सिर में गंभीर चोट आई और उन्हें 32 टांके लगे।
गोल्ड लोन से खुला चोरी का राज
पीड़ित के अनुसार, चोरी गए जेवरों की जानकारी उन्हें तब मिली जब कार के डैशबोर्ड में एक पर्ची मिली, जिसमें गोल्ड लोन कंपनी में जेवर गिरवी रखने का संकेत था। जांच करने पर सामने आया कि वही जेवर लोन के लिए इस्तेमाल किए गए थे। इसके समर्थन में उनके पास खरीद के बिल, फोटोग्राफ और गोल्ड लोन की रसीद जैसे दस्तावेज मौजूद हैं।
पुलिस सैटिंग….
मामले में सबसे बड़ा विवाद पुलिस जांच को लेकर सामने आया है। पीड़ित का आरोप है कि तमाम पुख्ता सबूत होने के बावजूद पुलिस ने चोरी के मामले में अंतिम रिपोर्ट (FR) लगा दी। उनका कहना है कि पहले मामले की गंभीरता से जांच चल रही थी और गिरफ्तारी के प्रयास भी हुए, लेकिन बाद में जांच अधिकारी और थानाधिकारी बदलने के बाद रुख बदल गया।
पीड़ित ने आरोप लगाया है कि आरोपी के रसूखदार संपर्कों और “पुलिस सैटिंग” के चलते मामले को कमजोर किया गया। यही नहीं, साक्ष्यों को नजरअंदाज कर एफआर लगाकर फाइल कोर्ट भेज दी गई।
चोरी के गहनों की तस्वीरें
राधेश्याम चौधरी का कहना है कि उनके पास चोरी के गहनों की तस्वीरें, खरीद के बिल और गोल्ड लोन कंपनी की रसीद जैसे मजबूत सबूत मौजूद हैं, लेकिन पुलिस ने इन्हें गंभीरता से नहीं लिया। यहां तक कि 10 साल पुरानी तस्वीरों को भी मानने से इनकार कर दिया गया।
एफआर से असंतुष्ट पीड़ित ने पुलिस के उच्चाधिकारियों—एडिशनल डीसीपी, डीसीपी साउथ, एडिशनल कमिश्नर क्राइम और पुलिस कमिश्नर जयपुर तक शिकायत की है। उन्होंने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर एफआर को चुनौती दी जाए और पूरे मामले की दोबारा जांच हो।
