
यरुशलम – इजराइल के आम चुनाव में किसी भी खेमे को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। सेंट्रल इलेक्शन कमेटी द्वारा जारी अंतिम नतीजों के मुताबिक प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के दक्षिणपंथी और धार्मिक दलों के गठबंधन को 120 सदस्यीय नेसेट में 53 सीटें मिली हैं, जो बहुमत के लिए जरूरी 61 सीटों से 8 सीट कम है। मुख्य विपक्षी ब्लॉक को 48 और अरब नेतृत्व वाले दलों को रिकॉर्ड 19 सीटें मिली हैं।
नतीजों के बाद लिकुड पार्टी ने चुनाव को “चोरी” बताया है। पार्टी ने X पर बयान जारी कर आरोप लगाया कि अरब बहुल इलाकों में वोटर फ्रॉड, धमकी और विदेशी फंडिंग से चुनाव प्रभावित किया गया। लिकुड ने इजराइली पुलिस, इलेक्शन कमेटी और घरेलू सुरक्षा एजेंसी शिन बेट में सबूत जमा करने का दावा किया है।
चुनाव समिति के प्रमुख जस्टिस नोआम सोलबर्ग ने शिकायतों को गंभीर बताते हुए शिन बेट निदेशक डेविड जिनी को जांच के निर्देश दिए हैं, हालांकि समिति के महानिदेशक डीन लिवने ने व्यापक धांधली के आरोपों को आधारहीन बताते हुए कहा कि मतदान “कानूनी रूप से संपन्न” हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स में कतर से फंडिंग का शक जताया गया, जिसे कतर ने “हास्यास्पद और खतरनाक” कहकर खारिज कर दिया।
अरब दलों – जॉइंट लिस्ट (11 सीटें) और राआम (8 सीटें) ने लिकुड के सभी आरोपों को खारिज किया है। करीब 20% अरब आबादी वाले देश में 77.9% की रिकॉर्ड वोटिंग हुई, जिसमें 57 लाख से ज्यादा वोट पड़े।
अब स्थिति यह है कि न नेतन्याहू और न ही विपक्षी नेता गादी आइजनकोट का ब्लॉक अकेले सरकार बना सकता है। अरब दल किंगमेकर की भूमिका में आ गए हैं। राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग को आधिकारिक नतीजे अगले सप्ताह सौंपे जाएंगे और नई नेसेट 10 नवंबर को शपथ लेगी, यदि गठबंधन नहीं बना तो इजराइल फिर से राजनीतिक गतिरोध और नए चुनाव की ओर जा सकता है।