Middle East tension: हिंद महासागर में अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी युद्धपोत IRIS डेना को टारपीडो दागकर समुद्र में डुबो दिया था. इस घटना के बाद अब श्रीलंका की राजनीति में भूचाल आ गया है. श्रीलंकाई संसद में विपक्षी नेताओं ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि (Middle East tension) ईरानी जहाज को जानबूझकर घंटों तक समुद्र में इंतजार कराया गया, जिसके बाद उस पर टॉरपीडो हमला हुआ.
श्रीलंका में शरण मांगी थी…
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, श्रीलंकाई संसद में विपक्षी सांसद मुजीबुर रहमान ने सरकार को घेरते हुए पूछा कि आखिर IRIS डेना को गाले बंदरगाह के बाहर 11 घंटे तक क्यों रोका गया? उन्होंने दावा किया कि जहाज ने संघर्ष की स्थिति के कारण श्रीलंका में शरण मांगी थी, लेकिन उसे अनुमति नहीं मिली. साथ ही रहमान ने पूछा कि श्रीलंकाई अधिकारियों ने किसके दबाव में आकर अनुमति देने में देरी की?
अब IRIS डेना के बाद एक और ईरानी नौसैनिक जहाज श्रीलंका के विशेष आर्थिक क्षेत्र में पहुंचा है. इस जहाज में 100 से ज्यादा नाविक सवार हैं. इस जहाज ने भी सहायता मांगी है. इस पर सरकार के प्रवक्ता नलिंदा जयतिस्सा ने कहा कि सरकार मानवीय आधार पर इस मामले को सुलझाने और क्षेत्रीय शांति बनाए रखने की कोशिश हो रही है.
ईरानी युद्धपोत IRIS डेना
बता दें, बुधवार सुबह करीब 5:00 बजे ईरानी युद्धपोत IRIS डेना से पहला इमरजेंसी संदेश मिला था, लेकिन जब तक मदद पहुंचती, अमेरिकी टॉरपीडो हमले के कारण जहाज पूरी तरह डूब चुका था. बस पानी पर तेल की परत तैर रही थी. इस युद्धपोत पर 180 लोग सवार थे. अमेरिका ने इस हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अपनी तरह का पहला हमला है.
