ईरान-इजराइल युद्ध खतरनाक मोड़ पर, तेहरान के तेल भंडारण केंद्र में भीषण आग से मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा

Tehran Oil Depot Blast

Tehran Oil Depot Blast: ईरान और इजराइल के बीच चल रहा युद्ध शनिवार देर रात और तेज हो गया, जब Tehran में एक तेल भंडारण सुविधा (ऑयल स्टोरेज फैसिलिटी) पर हमले के बाद आसमान में आग की ऊंची लपटें उठती दिखाई दीं। इस हमले के बाद पूरे इलाके में रात के अंधेरे में दूर-दूर तक आसमान लाल चमकता नजर आया। ईरान के सरकारी मीडिया ने इस हमले की पुष्टि की है। (Tehran Oil Depot Blast)वहीं अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी Associated Press की वीडियो फुटेज में भी तेहरान के क्षितिज पर आग की तेज रोशनी दिखाई दी।

इजराइल ने की नए हमलों की पुष्टि

इजराइल की सेना ने भी तेहरान में नए हमलों की लहर चलने की पुष्टि की। सेना के मुताबिक शहर के पूर्वी और दक्षिणी इलाकों में कई जोरदार धमाके हुए, जिससे आसपास के मोहल्लों में झटके महसूस किए गए।

हालांकि इजराइली सेना ने तुरंत यह नहीं बताया कि हमले में किन-किन ठिकानों को निशाना बनाया गया। बताया जा रहा है कि यह पहली बार है जब इस युद्ध के दौरान किसी नागरिक औद्योगिक सुविधा को निशाना बनाया गया है। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस हमले के बाद कहा कि युद्ध अभी खत्म होने वाला नहीं है और आने वाले दिनों में संघर्ष के अगले चरण में “कई बड़े सरप्राइज” देखने को मिलेंगे।

 पड़ोसी देशों को परेशानी हुई

इस बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने एक बयान में पड़ोसी देशों से माफी मांगी। उन्होंने कहा कि ईरान के हमलों की वजह से अगर पड़ोसी देशों को परेशानी हुई है तो उन्हें इसका अफसोस है। हालांकि उसी समय ईरान की मिसाइलें और ड्रोन खाड़ी के अरब देशों की दिशा में उड़ते देखे गए। वहीं ईरान के कट्टरपंथी नेताओं ने साफ कहा कि तेहरान की युद्ध रणनीति में कोई बदलाव नहीं होगा।

ईरान के नेतृत्व में मतभेद

रिपोर्टों के अनुसार ईरान के राजनीतिक नेतृत्व के भीतर भी इस युद्ध को लेकर मतभेद सामने आ रहे हैं। कुछ नेता संघर्ष को कम करने और बातचीत का रास्ता तलाशने के पक्ष में हैं, जबकि अन्य नेता अमेरिका और इजराइल के खिलाफ लड़ाई जारी रखने के पक्ष में हैं। यह विवाद खास तौर पर उस नेतृत्व परिषद के दो सदस्यों के बीच देखा गया है जो ईरान की सत्ता देख रही है। यह परिषद उस समय बनाई गई थी जब युद्ध की शुरुआती हवाई हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत हो गई थी।

खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी देशों ने भी कहा है कि अमेरिकी सरकार ने युद्ध शुरू होने से पहले उन्हें पर्याप्त समय नहीं दिया, जिससे वे स्थिति के लिए ठीक से तैयारी कर सकें।

बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ेगी…

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर हालात नहीं बदले तो ईरान को “बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ेगी”। उन्होंने यह भी कहा कि आगे और कई इलाके और लोगों के समूह हमलों के निशाने पर आ सकते हैं, हालांकि उन्होंने इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी।

लगातार हो रहे हमलों और सैकड़ों अमेरिकी-इजराइली हवाई हमलों की वजह से ईरान की सैन्य और राजनीतिक स्थिति कमजोर होती दिख रही है। इस संघर्ष का असर वैश्विक बाजारों पर भी पड़ने लगा है और कई जगह आर्थिक अस्थिरता बढ़ रही है।

 जिसे वे अपने साथ कब्र तक ले

राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने ट्रंप की उस मांग को भी खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने ईरान से बिना शर्त आत्मसमर्पण करने को कहा था। पेजेश्कियन ने कहा, “यह सिर्फ एक सपना है, जिसे वे अपने साथ कब्र तक ले जाएं।” विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इसी तरह हमले जारी रहे तो यह युद्ध पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में और बड़ा संकट पैदा कर सकता है।

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