DRDO Missile Test: भारत ने रक्षा क्षेत्र में आज एक और नया इतिहास रच दिया है. रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने दुश्मनों के अलग-अलग खतरों से निपटने के लिए कई स्वदेशी तकनीकों का सफल प्रदर्शन किया है. देश की सुरक्षा को अभेद्य बनाने के उद्देश्य से एक साथ (DRDO Missile Test)तीन मिसाइलों का सफल टेस्ट किया गया. DRDO के वैज्ञानिकों ने लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों के हमले से बचने के लिए ‘मल्टी-लेयर्ड डिफेंस सिस्टम’ का प्रदर्शन किया, जिसमें उन्हें बड़ी कामयाबी मिली है.
टारगेट को हवा में ही सटीक निशाना
DRDO के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि इस आधुनिक डिफेंस सिस्टम ने सामने से आ रहे बैलिस्टिक मिसाइल टारगेट को हवा में ही सटीक निशाना बनाकर नष्ट कर दिया. अधिकारियों के मुताबिक, भविष्य के युद्धों में मिसाइल के खतरों से निपटने के लिए इस नई तकनीक को पूरी तरह तैयार कर लिया गया है. जिन दो इंटरसेप्टर मिसाइलों का परीक्षण किया गया है, वे 2,000 किलोमीटर से लेकर 5,000 किलोमीटर की दूरी से आने वाली दुश्मन की मिसाइलों को पलक झपकते ही तबाह करने की ताकत रखती हैं.
भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों
दरअसल, भारत को इस मिसाइल डिफेंस सिस्टम की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि पड़ोसी देश पाकिस्तान लगातार अपनी ‘फतेह-1’ और ‘फतेह-2’ मिसाइलों को अपग्रेड कर रहा है. इसके साथ ही वह चीन की मदद से ‘P282’ जैसी लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें भी तैयार कर रहा है. चीन और पाकिस्तान की इसी चालबाजी और खतरे को भांपते हुए DRDO अपने मिसाइल डिफेंस सिस्टम को मजबूत करने में जुटा था. इस सफल परीक्षण के बाद भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों की लीग में शामिल हो गया है, जिनके पास लंबी दूरी और अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल हमलों से खुद को बचाने की अचूक क्षमता है.
नौसेना की ताकत भी हुई दोगुनी
इस बड़े परीक्षण के साथ ही DRDO ने भारतीय नौसेना के लिए ‘एंटी-शिप मिसाइल-मीडियम रेंज’ का भी पहला सफल उड़ान परीक्षण पूरा किया है. इस टेस्ट ने मध्यम दूरी पर मौजूद दुश्मन के युद्धपोतों और जहाजों को नष्ट करने की क्षमता को साबित किया है. इस नई मिसाइल के आने से भारतीय नौसेना की समुद्री हमले की ताकत पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो जाएगी.
