Court bomb threat India: नई दिल्ली। देश के अलग-अलग हिस्सों में मंगलवार को न्यायालयों को ई-मेल के जरिए बम धमकी भरे संदेश मिलने से हड़कंप मच गया। उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, झारखंड और छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर आ गईं। (Court bomb threat India)हर जगह पुलिस, बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वाड ने व्यापक तलाशी अभियान चलाया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ई-मेल में तय समय के भीतर कार्रवाई न होने पर न्यायालयों को उड़ाने की धमकी दी गई थी। हालांकि शुरुआती जांच और तलाशी के दौरान किसी भी परिसर में कोई संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक सामग्री नहीं मिली। अधिकारियों ने इन धमकियों को फिलहाल फर्जी बताया है।
उत्तर प्रदेश में दोहराई गई वारदात
उत्तर प्रदेश के कई जिला न्यायालयों को धमकी भरे ई-मेल मिले। अमरोहा जिला न्यायालय को 10 दिनों में दूसरी बार ऐसा मेल मिलने से अफरातफरी का माहौल बन गया। पुलिस ने परिसर खाली कराकर सघन जांच की, लेकिन कोई खतरा सामने नहीं आया।
बंगाल, झारखंड में भी अलर्ट
पश्चिम बंगाल के आसनसोल और सिउड़ी जिला अदालतों में भी सुरक्षा बढ़ाई गई। इसी तरह झारखंड के धनबाद सिविल कोर्ट को धमकी मिलने के बाद कोर्ट परिसर को खाली कराकर जांच की गई। सभी स्थानों पर तलाशी के बाद स्थिति सामान्य घोषित की गई।
राजस्थान और छत्तीसगढ़ में सुरक्षा कड़ी
राजस्थान उच्च न्यायालय और छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय समेत बलौदाबाजार जिला कोर्ट को भी ई-मेल के जरिए धमकी मिली। पुलिस, बम निरोधक और डॉग स्क्वाड की टीमों ने पूरे परिसर की जांच की। कहीं भी कोई विस्फोटक नहीं मिला, लेकिन एहतियातन सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है।
साइबर शरारत या संगठित साजिश?
सुरक्षा एजेंसियां अब साइबर सेल के साथ मिलकर ई-मेल के स्रोत का पता लगाने में जुटी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संगठित साइबर शरारत भी हो सकती है, जिसका मकसद न्यायिक व्यवस्था में भय और अस्थिरता फैलाना है।
हर धमकी को गंभीरता से लेते हुए पुलिस पहले परिसर खाली कराती है, फिर विस्तृत जांच करती है ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।
बड़ा सवाल
लगातार मिल रही फर्जी धमकियां सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता तो दिखाती हैं, लेकिन यह भी सवाल खड़ा करती हैं कि न्यायिक संस्थानों को निशाना बनाकर दहशत फैलाने की कोशिश कौन कर रहा है? जांच जारी है और अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि दोषियों की पहचान कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
