
NEW DELHI : SIR में कथित गड़बड़ियों को लेकर विपक्षी ‘INDIA’ गठबंधन और केंद्र सरकार के बीच राजनीतिक टकराव बेहद तेज हो गया है। एक न्यूज़ रिपोर्ट के बाद उठे विवाद के बीच कांग्रेस के नेतृत्व में INDIA ब्लॉक ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नई दिल्ली के रामलीला मैदान में महारैली का आयोजन किया है।
सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक चलने वाले इस 7 घंटे के विरोध प्रदर्शन में हजारों की संख्या में समर्थक, छात्र और नागरिक समाज से जुड़े लोग शामिल हुए हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस रैली को भारतीय लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए एक अहम आंदोलन करार दिया।
प्रदर्शन के दौरान भारतीय युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता सफेद कपड़ों में पहुंचे, जो “घोस्ट वोटर्स” (काल्पनिक या हटाए गए मतदाताओं) का प्रतीक थे। इसका मकसद उन नागरिकों की आवाज उठाना था, जिनके नाम वोटर लिस्ट से कथित तौर पर गलत तरीके से हटा दिए गए या उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
अक्टूबर के शुरुआती हफ्तों में हुए भारी विरोध प्रदर्शनों के बाद दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को विरोध स्थल की सूची से हटाकर रामलीला मैदान को नए आंदोलन स्थलों में शामिल किया था। सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए 3,000 से अधिक पुलिसकर्मियों और 10,000 अर्धसैनिक बलों के जवानों को तैनात किया गया है, ताकि लगभग 50,000 लोगों की संभावित भीड़ को नियंत्रित रखा जा सके और किसी को जंतर-मंतर की ओर बढ़ने से रोका जा सके।
यह रैली कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर आयोजित एक प्रतीकात्मक “सार्वजनिक महाभियोग” के एक दिन बाद हुई है। उस दौरान राहुल गांधी ने दावा किया था कि विपक्ष के पास ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए पर्याप्त सबूत हैं।
दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने विपक्ष के इस अभियान पर तीखा पलटवार किया है। भाजपा ने इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक नाटक करार देते हुए तंज कसा कि विपक्ष चाहे तो राहुल गांधी को अपना “मॉक प्रधानमंत्री” घोषित कर सकता है। इसके साथ ही, भाजपा ने रोहतक (हरियाणा) में अपने प्रदेश अध्यक्ष नितिन नबीन के नेतृत्व में INDIA ब्लॉक के खिलाफ एक जवाबी रैली का आयोजन किया है।