कैंसर इलाज में नई क्रांति, डर्वालुमैब को भारत में मंजूरी, अब शरीर खुद करेगा कैंसर पर सीधा हमला

Imfinzi:

Imfinzi: नई दिल्ली। कैंसर का नाम सुनते ही ज्यादातर लोगों के मन में कीमोथेरेपी की दर्दनाक छवि उभरती है। बाल झड़ना, कमजोरी, उलझन और लंबे इलाज का डर—ये सब आम चिंताएं हैं। लेकिन अब भारत में कैंसर इलाज की तस्वीर बदलती दिख रही है। भारत की दवा नियामक संस्था CDSCO ने इम्यूनोथेरेपी दवा डर्वालुमैब (Imfinzi) को एक नए उपयोग के लिए मंज़ूरी दे दी है। इसे कैंसर उपचार के क्षेत्र में एक बड़ी प्रगति माना जा रहा है।


क्या है डर्वालुमैब और क्यों है यह खास?

डर्वालुमैब, जिसे Imfinzi ब्रांड नाम से जाना जाता है, एक इम्यूनोथेरेपी दवा है। पारंपरिक कीमोथेरेपी जहां शरीर की तेजी से बढ़ने वाली सभी कोशिकाओं—चाहे वे स्वस्थ हों या कैंसरग्रस्त—को प्रभावित करती है, वहीं डर्वालुमैब शरीर के इम्यून सिस्टम को सक्रिय कर कैंसर कोशिकाओं पर हमला करवाती है।

यानी यह दवा सीधे कैंसर को मारने की बजाय शरीर की प्राकृतिक रक्षा प्रणाली को मजबूत बनाती है। इलाज बाहर से नहीं, बल्कि शरीर के अंदर से होता है—यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है।


PD-L1 क्या है और कैंसर इससे कैसे बचता है?

कैंसर कोशिकाएं बेहद चालाक होती हैं। वे अपने ऊपर PD-L1 नाम का एक प्रोटीन बना लेती हैं, जो इम्यून सिस्टम को भ्रमित करता है। यह प्रोटीन T-Cells को संकेत देता है—“मुझ पर हमला मत करो।”

डर्वालुमैब इसी PD-L1 प्रोटीन को ब्लॉक कर देती है। जैसे ही यह ढाल हटती है, शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कैंसर कोशिकाओं को पहचानकर उन पर हमला शुरू कर देती है।


भारत में किस कैंसर के लिए मिली नई मंज़ूरी?

एस्ट्राज़ेनेका फार्मा इंडिया को CDSCO से मंज़ूरी मिली है कि वह डर्वालुमैब का उपयोग एंडोमेट्रियल कैंसर (गर्भाशय का कैंसर) में कर सके। खासतौर पर उन मरीजों में, जिनमें:

  • प्राइमरी एडवांस्ड स्टेज कैंसर हो
  • कैंसर दोबारा लौट आया हो

इस दवा को कार्बोप्लाटिन और पैक्लिटैक्सेल कीमोथेरेपी के साथ दिया जा सकता है, और कुछ मरीजों में बाद में इसे अकेले (Monotherapy) भी इस्तेमाल किया जाएगा।


किन-किन कैंसर में पहले से हो रहा है इस्तेमाल?

डर्वालुमैब पहले से कई गंभीर कैंसर के इलाज में उपयोग हो रही है, जैसे:

  • नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर (NSCLC)
  • स्मॉल सेल लंग कैंसर (SCLC)
  • लिवर कैंसर
  • बाइलरी ट्रैक्ट कैंसर
  • एंडोमेट्रियल कैंसर
  • गैस्ट्रिक (पेट) कैंसर

भारत में गैस्ट्रिक कैंसर के मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में यह दवा हजारों मरीजों के लिए नया विकल्प बन सकती है।


क्या हैं इसके संभावित साइड इफेक्ट?

क्योंकि यह दवा इम्यून सिस्टम को सक्रिय करती है, इसलिए कुछ इम्यून-रिलेटेड साइड इफेक्ट देखे जा सकते हैं:

  • थकान
  • सांस लेने में दिक्कत
  • खांसी
  • स्किन रैश
  • मांसपेशियों में दर्द

कुछ मामलों में इम्यून सिस्टम गलती से शरीर के स्वस्थ अंगों—जैसे थायरॉइड, फेफड़े या लिवर—को भी प्रभावित कर सकता है। इसलिए यह उपचार विशेषज्ञ डॉक्टर की निगरानी में ही किया जाता है।


भारत के लिए क्यों अहम है यह मंज़ूरी?

डर्वालुमैब की उपलब्धता से भारत में कैंसर का इलाज अधिक पर्सनलाइज़्ड और टारगेटेड हो सकता है। क्लिनिकल ट्रायल्स में पाया गया है कि इस दवा से कई प्रकार के कैंसर में सर्वाइवल रेट बेहतर हुआ है और कैंसर के दोबारा लौटने का खतरा कम हुआ है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मंज़ूरी भारत में कैंसर उपचार की दिशा बदल सकती है—जहां इलाज केवल दवाओं के ज़ोर पर नहीं, बल्कि शरीर की अपनी ताकत के सहारे होगा।

इम्फिंज़ी (डर्वालुमैब) सिर्फ एक नई दवा नहीं है, बल्कि कैंसर इलाज की बदलती सोच का प्रतीक है। कीमोथेरेपी से आगे बढ़ते हुए अब चिकित्सा विज्ञान इम्यून सिस्टम को हथियार बना रहा है। आने वाले समय में यह तकनीक लाखों मरीजों के लिए उम्मीद की नई किरण बन सकती है।

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