Jaipur : राजस्थान के बहुचर्चित नौकरशाही संपत्ति विवाद में सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए उद्योग एवं एमएसएमई विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) और रीको (RIICO) के अध्यक्ष वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल को देर रात पदमुक्त कर एपीओ (Awaiting Posting Orders) कर दिया है। कार्मिक विभाग द्वारा जारी इस आदेश के साथ ही उन्हें उद्योग, दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर और निवेश संवर्धन ब्यूरो (BIP) के प्रमुख पदों की जिम्मेदारियों से तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है।
यह पूरी प्रशासनिक कार्रवाई आईएएस शिखर अग्रवाल, उनकी पत्नी एडीजी आईपीएस प्रशाखा माथुर, दोनों बेटों और सास-ससुर के नाम पर एक ही निजी कंपनी ‘गोयल फैशन्स प्राइवेट लिमिटेड’ से खरीदे गए 40 लग्जरी विला और कॉटेज से जुड़ी है। खुलासे के मुताबिक, महज ढाई साल के भीतर अलवर के अजबगढ़ में 20 विला और उदयपुर के बुझड़ा स्थित अनंता रिसॉर्ट में 20 कॉटेज कुल 6 करोड़ 16.5 लाख रुपये में खरीदे गए थे। सौदे के तुरंत बाद इन सभी संपत्तियों को सालाना 1.80 करोड़ रुपये के एवज में वापस उसी कंपनी को लीज पर दे दिया गया।
विवाद उस समय और गहरा गया जब यह बात सामने आई कि मार्च 2026 में अलवर के अजबगढ़ विला की रजिस्ट्री वाले दिन ही वित्त विभाग ने उसी बिक्रेता कंपनी को राजस्थान निवेश प्रोत्साहन नीति (RIPS) के तहत टैक्स छूट और वेतन सब्सिडी का कस्टमाइज्ड पैकेज जारी किया था। इसके साथ ही अधिकारी दंपत्ति के सालाना अचल संपत्ति विवरण (IPR) में कई संपत्तियों के ब्यौरे गायब मिलने पर पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि, अग्रवाल ने सभी जानकारियां पोर्टल पर जमा करने का दावा करते हुए इसे तकनीकी त्रुटि बताया है। मामले के गरमाने के बाद विपक्षी दलों ने पूरे घटनाक्रम की उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच की मांग की है।
