gst 40 percent tax: नई दिल्ली: सरकार GST व्यवस्था में व्यापक बदलाव की तैयारी में है। प्रस्ताव के अनुसार, sin और demerit goods पर विशेष 40% कर लगाया जा सकता है। संभावित सूची में पान मसाला, तंबाकू, सिगरेट, लग्जरी कारें और ऑनलाइन गेमिंग शामिल हैं। राजस्व विभाग ने इन वस्तुओं/सेवाओं को देश के “सामाजिक मूल्यों” के आधार पर इस श्रेणी में रखा है।
क्यों बढ़ रहा है टैक्स?
- उच्च सामाजिक/स्वास्थ्य जोखिम वाले उत्पादों और गतिविधियों पर डिटरेंस (निरोधक) प्रभाव बनाना।
- केंद्र और राज्यों के लिए अतिरिक्त राजस्व जुटाना।
- उपभोक्ताओं का अत्यधिक समय/धन खर्च करने का व्यवहार नियंत्रित करना, विशेषकर रियल-मनी गेमिंग में।
इंडस्ट्री पर असर
यदि नया प्रस्ताव लागू होता है, तो फैंटेसी स्पोर्ट्स और रियल-मनी गेमिंग प्लेटफॉर्म्स को बड़ा झटका लग सकता है। पहले ही 28% जीएसटी का विरोध हो चुका है। नीति-निर्माताओं की चिंता है कि:
- यूजर्स प्लेटफॉर्म्स पर अत्यधिक खर्च कर रहे हैं।
- गेम के दौरान बिना स्पष्ट सहमति के डेबिट जैसे विवाद उभर रहे हैं।
- ऑनलाइन गेमिंग पर 28% जीएसटी लागू होने के बाद सिर्फ 6 महीनों में राजस्व 412% बढ़ा: ₹1,349 करोड़ → ₹6,909 करोड़।
- कैसीनो से आमदनी में भी लगभग 30% वृद्धि दर्ज हुई।
- संकेत: टैक्स बढ़ने पर भी मांग में उल्लेखनीय कमी नहीं आई।
हर महीने ₹10,000 करोड़ ऑनलाइन गेमिंग पर
मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन के अनुसार भारतीय उपभोक्ता हर महीने औसतन ₹10,000 करोड़ ऑनलाइन गेमिंग पर खर्च कर रहे हैं—यानी सालाना लगभग ₹1.2 लाख करोड़। यह आकलन NPCI के UPI ट्रांजैक्शन डेटा से निकला है। नीति-निर्माताओं के अनुसार, यह समय और धन की अत्यधिक खपत का संकेत है।
PMLA और KYC पर सख्ती की तैयारी
- ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों को PMLA (मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून) के दायरे में लाने पर विचार।
- कंपल्सरी KYC, सस्पिशियस ट्रांजैक्शन मॉनिटरिंग और डेटा रिपोर्टिंग जैसे प्रावधान लागू हो सकते हैं।
- उद्देश्य: गैर-कानूनी फंड फ्लो रोकना, यूजर सुरक्षा सुनिश्चित करना, और रेगुलेटरी पारदर्शिता बढ़ाना।
कौन-कौन हो सकते हैं 40% विशेष टैक्स के दायरे में?
- पान मसाला, तंबाकू, सिगरेट—उच्च स्वास्थ्य-जोखिम और सामाजिक लागत।
- लग्जरी कारें—हाई-एंड कंजम्प्शन पर प्रीमियम टैक्स।
- ऑनलाइन गेमिंग—रियल-मनी/फैंटेसी सेगमेंट्स, जहां खर्च और लत की आशंका ज्यादा।
उपभोक्ताओं और कंपनियों के लिए क्या मायने?
- कंपनियाँ: टैक्स बर्डन बढ़ने से प्राइसिंग, यूजर एक्विजिशन और लाभप्रदता पर दबाव।
- यूजर्स: नेट पेआउट/प्राइस बढ़ सकते हैं; KYC और AML अनुपालन कड़े होंगे।
- सरकार: अतिरिक्त राजस्व और हॉर्म-रिडक्शन लक्ष्य साथ-साथ संभव।
