Police Negligence: गांधीनगर रेलवे स्टेशन पर रेलवे जीएम के बेटे का चोरी हुआ मोबाइल फोन पुलिस ने महज 90 मिनट में रिकवर कर लिया। इस तत्परता ने आम नागरिकों के साथ पुलिस के व्यवहार पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जबकि आम लोगों की शिकायतों पर पुलिस अक्सर निष्क्रिय रहती है( Police Negligence) और मोबाइल चोरी होने के बावजूद केवल गुमशुदगी दर्ज कर इतिश्री कर देती है।
तत्परता में बड़ा अंतर
रेलवे जीएम के बेटे के मोबाइल फोन की चोरी की सूचना मिलते ही पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की। स्टेशन परिसर में लगे सीसीटीवी फुटेज, गवाहों और मोबाइल लोकेशन की मदद से मात्र 90 मिनट में फोन बरामद कर लिया गया। वहीं, आम नागरिक जब पुलिस से इसी प्रकार की मदद मांगते हैं, तो कई बार शिकायत दर्ज करने में भी देरी होती है। अधिकांश मामलों में मोबाइल चोरी होने के बावजूद पुलिस केवल गुमशुदगी दर्ज कर इतिश्री कर लेती है और आगे की कार्रवाई नहीं करती।
आम आदमी की परेशानी
पुलिस की इस तरह की निष्क्रियता आम नागरिकों में नाराजगी पैदा कर रही है। चोरी हुई संपत्ति के मामले में पीड़ितों को न्याय मिलने में देरी होती है और उनका भरोसा पुलिस पर कम हो जाता है। वहीं, उच्च अधिकारियों के परिवार के मामलों में पुलिस की सक्रियता दिखाती है कि संसाधनों और कार्रवाई में असमानता है।
सक्रियता में समानता की जरूरत
विशेषज्ञों का कहना है कि पुलिस को सभी नागरिकों के मामलों में समान स्तर की तत्परता दिखानी चाहिए। चाहे मामला किसी उच्च अधिकारी से जुड़ा हो या आम नागरिक से, कार्रवाई में निष्पक्षता और तेजी अनिवार्य है। नागरिक सुरक्षा और विश्वास के लिए पुलिस को केवल प्रतीकात्मक कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहिए। रेलवे जीएम के बेटे का मोबाइल तुरंत रिकवर होना पुलिस की क्षमता दिखाता है, लेकिन आम आदमी के मामलों में यह क्षमता क्यों नजर नहीं आती, यह सवाल स्थानीय प्रशासन के सामने बड़ा मुद्दा बन गया है।
