MEA ने क्या कहा?

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक ब्रीफिंग में कहा: “मेरी जानकारी में ऐसा कोई बातचीत या फोन कॉल कल दोनों नेताओं के बीच नहीं हुआ।” उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत की ऊर्जा नीति केवल राष्ट्रीय हित और उपभोक्ताओं की सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाई जाती है।

ट्रम्प के दावे और उसके बाद की स्थितियां

ट्रम्प ने एक बयान में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें आश्वासन दिया है कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा और यह कदम यूक्रेन संकट के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को बल देगा। वहीं, मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी कार्रवाई — जिसमें कुछ भारतीय निर्यात पर कठोर टैरिफ भी शामिल बताये जा रहे हैं — ने भारत और चीन के बीच व्यापारिक तालमेल को बढ़ावा दिया है।

चीन-शेयर किए गए वादे और व्यापारिक सरगर्मियाँ

रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि कुछ भारतीय व्यापारी कथित तौर पर देश के सरकारी रिफाइनरियों से रूसी तेल के लिए चीनी युआन में भुगतान करने का अनुरोध कर रहे हैं, जो अगर साकार हुआ तो वैश्विक पटल पर संभावित राजनीतिक-आर्थिक प्रभाव पैदा कर सकता है।

ट्रम्प ने मोदी को दोस्त बताया

ट्रम्प ने कहा, “वे (प्रधानमंत्री मोदी) मेरे दोस्त हैं। हमारे बहुत अच्छे संबंध हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें यह पसंद नहीं आया कि भारत रूस से तेल खरीद रहा था, और उन्होने दावा किया कि मोदी ने उन्हें आश्वासन दिया कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा।

भारत की ऊर्जा प्राथमिकता और रूस से मिलने वाला डिस्काउंट

MEA ने दोहराया कि भारत एक बड़ा तेल-आयातक है और उसकी प्राथमिकता स्थिर कीमतें व सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित करना है। सूत्रों के अनुसार भारत अपना करीब एक-तिहाई तेल रूस से खरीदता है, और रूस द्वारा प्रति बैरल लगभग 3-4 डॉलर का डिस्काउंट देने की जानकारी मिलती रही है, जो भारत के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी माना जाता है। यह स्पष्ट है कि ट्रम्प के दावे और MEA की प्रतिक्रिया के बीच मतभेद से कूटनीतिक बहस गर्म है और आगे इसके राजनीतिक-आर्थिक प्रभावों पर नजर रखी जा रही है।