Bhilwara News: भीलवाड़ा। आखिर सुरक्षित मानी जाने वाली सामान्य डिलीवरी भी मौत का कारण क्यों बन रही है? भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में एक बार फिर दो प्रसूताओं की मौत ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि दोनों महिलाओं की नॉर्मल डिलीवरी हुई थी, वे अस्पताल में भी सामान्य स्थिति में पहुंची थीं और हाई-रिस्क श्रेणी में भी शामिल नहीं थीं। (Bhilwara News)इसके बावजूद दोनों की जान नहीं बच सकी। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली, इलाज की गुणवत्ता और प्रसूति प्रबंधन पर सवाल उठने लगे हैं।
भीलवाड़ा की ही थीं दोनों प्रसूताएं
जिन प्रसूताओं की मौत हुई है उनमें भीलवाड़ा के कोटड़ी की रहने वाली सुगना बैरवा (22) और पटेल नगर की रानी बंजारा (18) शामिल हैं। इनके परिजनों का कहना है कि सुगना की तो बुधवार शाहपुरा जिला अस्पताल में नॉर्मल डिलिवरी हुई थी। लेकिन कुछ देर बाद उसका BP लो हो गया तो इसे महात्मा गांधी अस्पताल रेफर कर दिया गया। यहां कुछ देर बाद उसकी मौत हो गई।
वहीं रानी के परिजनों का कहना है कि उसकी डिलीवरी तो महात्मा गांधी अस्पताल में ही हुई थी। प्रसव के दौरान उसे ब्लीडिंग शुरु हो गई। फिर उसकी मौत हो गई।
भीलवाड़ा में हुई थीं 5 प्रसूताओं की मौतें
कुछ दिन पहले भीलवाड़ा में ही 5 प्रसूताओं की सिजेरियन डिलीवरी के बाद मौत हो गई थी। जिससे एक बार फिर राजस्थान में हड़कंप मच गया था। क्योंकि कोटा, बीकानेर, बांसवाड़ा में लगातार प्रसूताओं की मौतें हो रही थीं। यानी इन 3 महीनों में 16 प्रसूताओं की मौत हो चुकी है।
लगातार प्रसूताओं की मौतों से दबाव में आए स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश के हर अस्पताल में प्रसूताओं की देख-रेख के लिए मॉनिटरिंग के पैनल के गठन के आदेश दिए थे। वे ये देखेंगे कि प्रसूताएं किस हालत में अस्पताल आ रही हैं, डिलीवरी कौन सी हुई है, हालत कब बिगड़ी है और इलाज में कौन सी दवाएं प्रयोग की जा रही हैं।
