Bank Locker Rules: बैंक लॉकर का इस्तेमाल लोग अपने कीमती गहने, अहम दस्तावेज और निजी संपत्तियों को सुरक्षित रखने के लिए करते हैं।ग्राहकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बैंक 24×7 CCTV निगरानी, सीमित एंट्री, अलार्म सिस्टम और अन्य आधुनिक इंतजाम करते हैं। (Bank Locker Rules) हालांकि, बहुत कम लोगों को पता है कि बैंक लॉकर का उपयोग कुछ तय नियमों और शर्तों के तहत ही किया जा सकता है।
भारतीय रिज़र्व बैंक RBI ने हाल के वर्षों में बैंक लॉकर से जुड़े नियमों में बदलाव किए हैं। इन नए दिशानिर्देशों के तहत लॉकर धारकों को संशोधित लॉकर एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर करना और उसकी सभी शर्तों का पालन करना अनिवार्य है।
बैंक लॉकर में क्या रख सकते हैं और क्या नहीं
RBI के अनुसार, बैंक लॉकर का इस्तेमाल किसी भी तरह के अवैध, गैर कानूनी या खतरनाक उद्देश्य के लिए नहीं किया जा सकता है। यदि कोई ग्राहक नियमों का उल्लंघन करता है, तो बैंक सख्त कार्रवाई कर सकता है।
बैंक लॉकर में रखने की अनुमति वाले सामान
- आभूषण ज्वेलरी
- लोन से जुड़े दस्तावेज
- संपत्ति के कागजात
- जन्म प्रमाण पत्र
- विवाह प्रमाण पत्र
- बीमा पॉलिसी
- सेविंग बॉन्ड
- अन्य गोपनीय और मूल्यवान दस्तावेज
बैंक लॉकर में ये सामान रखना मना है
- नकद राशि और करेंसी नोट
- हथियार और गोला बारूद
- ड्रग्स और नशीले पदार्थ
- विस्फोटक या तस्करी का सामान
- खराब होने वाली वस्तुएं
- रेडियोधर्मी या खतरनाक सामग्री
इसके अलावा ऐसी कोई भी वस्तु लॉकर में नहीं रखी जा सकती है जिससे बैंक कर्मचारियों या अन्य ग्राहकों को नुकसान या असुविधा हो। RBI के ये नियम बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता और ग्राहकों की सुरक्षा बनाए रखने के उद्देश्य से लागू किए गए हैं।
अगर 3 साल तक लॉकर का किराया नहीं दिया तो क्या होगा
यदि कोई ग्राहक लगातार तीन वर्षों तक बैंक लॉकर का किराया जमा नहीं करता है तो बैंक को उस लॉकर को खोलने का अधिकार होता है।
RBI की गाइडलाइंस के अनुसार ऐसी स्थिति में बैंक तय कानूनी प्रक्रिया अपनाकर लॉकर को तोड़ सकता है।
कानूनी प्रावधानों के तहत लॉकर खोलने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए।बैंक लॉकर से निकाली गई सभी वस्तुओं की विस्तृत इन्वेंट्री तैयार करता है।इसके बाद जब सामान ग्राहक को सौंपा जाता है तो उस सूची पर ग्राहक की लिखित स्वीकृति लेना अनिवार्य होता है।
RBI ने साफ किया है कि लॉकर संचालन से जुड़ी हर कार्रवाई का उद्देश्य ग्राहकों के हितों की रक्षा करना और विवाद की संभावनाओं को कम करना है।लॉकर धारकों को सलाह दी जाती है कि वे समय पर लॉकर रेंट का भुगतान और एग्रीमेंट का नवीनीकरण जरूर कराएं।
