राजस्थान पत्रिका की खबर पर बोर्ड सख्त, गर्भावस्था में आयुर्वेदिक दवाओं से जुड़े दावों पर मांगा वैज्ञानिक स्पष्टीकरण

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NCISM: जयपुर । गर्भावस्था के दौरान आयुर्वेदिक औषधियों के इस्तेमाल को प्रसूताओं की मृत्यु और गंभीर चिकित्सकीय जटिलताओं से जोड़ने वाले दावों पर बोर्ड ऑफ इंडियन मेडिसिन, राजस्थान ने गंभीर संज्ञान लिया है। बोर्ड ने प्रकाशित सामग्री के संबंध में राजस्थान पत्रिका के (NCISM)प्रधान संपादक से तथ्यात्मक और वैज्ञानिक स्पष्टीकरण मांगा है।

मामला राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित “गर्भावस्था के दौरान देखभाल में कमी से बढ़ता जोखिम” शीर्षक वाले लेख से जुड़ा है। बोर्ड के अनुसार, लेख में आयुर्वेदिक औषधियों के उपयोग को गर्भावस्था के दौरान संभावित जोखिम और प्रसूताओं की मृत्यु से जोड़कर प्रस्तुत किया गया है।

बोर्ड ऑफ इंडियन मेडिसिन, राजस्थान के रजिस्ट्रार डॉ. सीताराम शर्मा ने 31 अगस्त 2026 को राजस्थान पत्रिका के प्रधान संपादक को पत्र भेजकर संबंधित दावों का आधार स्पष्ट करने को कहा है।

वैज्ञानिक साक्ष्य मांगे

बोर्ड ने सवाल उठाया है कि यदि किसी प्रसूता की मृत्यु या गंभीर जटिलता को आयुर्वेदिक औषधि अथवा आयुर्वेदिक उपचार से जोड़ा गया है, तो इसके समर्थन में प्रमाणित वैज्ञानिक अध्ययन, मेडिकल रिकॉर्ड, विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट या अन्य विश्वसनीय चिकित्सकीय साक्ष्य क्या हैं।

बोर्ड का कहना है कि बिना प्रमाणित वैज्ञानिक और चिकित्सकीय साक्ष्य के किसी मृत्यु अथवा गंभीर जटिलता का कारण केवल आयुर्वेदिक औषधि या उपचार को नहीं माना जा सकता। किसी भी घटना के वास्तविक कारणों का निष्पक्ष चिकित्सकीय मूल्यांकन आवश्यक है।

अन्य कारणों की अनदेखी उचित नहीं

बोर्ड ने यह भी कहा कि किसी घटना के संभावित कारण के रूप में केवल आयुर्वेदिक औषधियों को प्रस्तुत करना और अन्य चिकित्सकीय अथवा व्यवस्थागत कारणों की अनदेखी करना उचित नहीं होगा। ऐसी अपूर्ण या अप्रमाणित जानकारी से आमजन में आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को लेकर भ्रम और अनावश्यक भय पैदा हो सकता है।

तथ्यात्मक समीक्षा और शुद्धि-पत्र की अपेक्षा

बोर्ड ऑफ इंडियन मेडिसिन, राजस्थान ने प्रकाशित सामग्री की तथ्यात्मक एवं वैज्ञानिक समीक्षा करने का अनुरोध किया है। यदि संबंधित दावे प्रमाणित तथ्यों पर आधारित नहीं पाए जाते हैं, तो बोर्ड ने उचित शुद्धि-पत्र (Corrigendum) अथवा स्पष्टीकरण (Clarification) प्रकाशित करने की अपेक्षा भी जताई है।

बोर्ड ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर समाचार सामग्री प्रकाशित करने से पहले संबंधित विषय विशेषज्ञों और सक्षम नियामक संस्थाओं से तथ्यों का सत्यापन करने का भी अनुरोध किया है।

NCISM के पत्र के संदर्भ में कार्रवाई

बोर्ड के अनुसार, यह कार्रवाई भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (NCISM), नई दिल्ली के 20 अगस्त 2026 के पत्र के संदर्भ में की गई है।

इस संबंध में डॉ. सीताराम शर्मा, रजिस्ट्रार, बोर्ड ऑफ इंडियन मेडिसिन, राजस्थान, जयपुर द्वारा राजस्थान पत्रिका के प्रधान संपादक को पत्र प्रेषित किया गया है।

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